
40+ छात्रों पर असर, अभिभावकों ने बताया विश्वासघात; मंत्री ने सख्त रुख अपनाया
बीच सत्र बोर्ड बदलने का आरोप, अभिभावकों का हंगामा; मंत्री तोखन साहू ने मांगी रिपोर्ट

यश विश्वकर्मा @ बिलासपुर। व्यापार विहार स्थित ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल एक बड़े विवाद में घिर गया है। अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि सत्र की शुरुआत में CBSE पैटर्न से पढ़ाई का भरोसा दिलाया गया, लेकिन साल के अंत में अचानक बोर्ड बदलकर छात्रों को CGBSE परीक्षा देने के लिए मजबूर किया गया।
भरोसे पर पढ़ाई, आखिर में बदले नियम
अभिभावकों के अनुसार, बच्चों ने पूरे सत्र में CBSE सिलेबस और परीक्षा पद्धति के अनुसार तैयारी की। लेकिन परीक्षा से ठीक पहले स्कूल ने बोर्ड बदलने का फैसला सुना दिया। इस अचानक बदलाव ने छात्रों को शैक्षणिक और मानसिक दोनों स्तर पर परेशानी में डाल दिया है।
40 से ज्यादा परिवारों में आक्रोश
इस फैसले से 40 से अधिक परिवार प्रभावित हुए हैं। अभिभावकों का कहना है कि यह सीधे तौर पर भरोसे के साथ खिलवाड़ है। उनका आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने पहले गलत जानकारी देकर एडमिशन लिया और बाद में नियम बदल दिए, जिससे बच्चों का पूरा साल दांव पर लग गया।
मामला पहुंचा केंद्र, मंत्री ने लिया संज्ञान

विवाद बढ़ने पर मामला केंद्र तक पहुंचा। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने इसे गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
यह मामला अब सिर्फ ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल तक सीमित नहीं रहा। इससे शिक्षा व्यवस्था में मान्यता, संबद्धता और निगरानी की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल: बच्चों के नुकसान की भरपाई कैसे?
अब सबसे अहम सवाल यही है कि जिन छात्रों का पूरा शैक्षणिक सत्र प्रभावित हुआ, उसकी भरपाई कैसे होगी?
शिक्षा में भरोसा टूटने का असर सिर्फ वर्तमान नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य पर भी पड़ता है।