

बिना मान्यता चल रहा था ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल, परीक्षा के बाद खुला राज, रात तक सड़क पर उतरे अभिभावक-विद्यार्थी
ब्रिलियंट स्कूल की पोल खुलते ही भड़के पालक, कलेक्ट्रेट से लेकर स्कूल तक विरोध प्रदर्शन
सीबीएसई का बोर्ड लगाकर कराया दाखिला, अब दोबारा परीक्षा का फरमान
मान्यता नहीं, फिर भी सालभर चला सीबीएसई का बोर्ड, स्कूल पर धोखाधड़ी के आरोप, पालकों का सवाल—शिक्षा विभाग अब तक क्यों सोया रहा
पहले ही खत्म हो चुकी थी वार्षिक परीक्षा, अचानक दोबारा एग्जाम की सूचना से भड़के अभिभावक

यश विश्वकर्मा @ बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर में शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सीबीएसई बोर्ड से संबद्धता का दावा कर सालभर सैकड़ों विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले व्यापार विहार स्थित ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल की पोल उस समय खुल गई, जब परीक्षा के बाद पता चला कि स्कूल के पास सीबीएसई की मान्यता ही नहीं है। इस खुलासे के बाद सोमवार को आक्रोशित विद्यार्थियों और अभिभावकों ने सुबह से लेकर देर रात तक जोरदार प्रदर्शन किया। स्कूल प्रबंधन पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए मिशन हॉस्पिटल रोड स्थित स्कूल ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल के मुख्यालय के सामने जमकर नारेबाजी की गई, जिससे इलाके में तनाव की स्थिति बन गई।

अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने पूरे साल सीबीएसई पाठ्यक्रम के नाम पर पढ़ाई कराई और बड़े-बड़े बोर्ड लगाकर प्रचार – प्रसार किया। इसी भरोसे पर सैकड़ों पालकों ने अपने बच्चों का दाखिला कराया। लेकिन वार्षिक परीक्षा के बाद अचानक पता चला कि स्कूल के पास सीबीएसई की मान्यता ही नहीं है। इससे बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है।
सोमवार को पूरे दिन व्यापार विहार स्थित ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल के बाहर अभिभावकों और विद्यार्थियों का जमावड़ा लगा रहा। लोगों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। गुस्साए अभिभावक कलेक्ट्रेट भी पहुंचे और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने और कड़ी कार्रवाई की मांग की।

अभिभावकों का कहना है कि जब स्कूल प्रबंधन की गलती सामने आई तो उसे छिपाने के लिए पांचवीं और आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों पर दोबारा परीक्षा देने का दबाव बनाया जाने लगा। जबकि बच्चों की वार्षिक परीक्षा पहले ही सीबीएसई पैटर्न के अनुसार पूरी हो चुकी है और उन्हें प्राप्तांक भी बता दिए गए हैं।
परिजनों का आरोप है कि एडमिशन के समय स्कूल प्रबंधन ने स्पष्ट रूप से कहा था कि यहां सीबीएसई पैटर्न से पढ़ाई और परीक्षा होगी, लेकिन अब अचानक कहा जा रहा है कि छात्रों का रिजल्ट छत्तीसगढ़ बोर्ड के तहत घोषित किया जाएगा। इस फैसले से विद्यार्थी और उनके अभिभावक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

अभिभावकों के मुताबिक पिछले चार-पांच दिनों से वे लगातार स्कूल प्रबंधन से जवाब मांग रहे हैं, लेकिन कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। इसी नाराजगी के चलते सोमवार को देर रात तक मिशन हॉस्पिटल रोड स्थित स्कूल परिसर में विरोध प्रदर्शन चलता रहा। प्रदर्शन के कारण सड़क पर जाम जैसी स्थिति बन गई। सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और अभिभावकों तथा विद्यार्थियों को समझाइश देकर स्थिति संभालने की कोशिश की।
इस पूरे मामले ने शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि जब संभागीय मुख्यालय बिलासपुर में इस तरह से बिना मान्यता के स्कूल चल सकता है, तो दूरदराज के इलाकों में क्या स्थिति होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
क्या है पूरा मामला
ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल ने खुद को सीबीएसई पैटर्न से संचालित बताकर सैकड़ों विद्यार्थियों का दाखिला लिया। पूरे साल सीबीएसई पाठ्यक्रम के नाम पर पढ़ाई और परीक्षा कराई गई। लेकिन परीक्षा के बाद खुलासा हुआ कि स्कूल के पास सीबीएसई की मान्यता ही नहीं है। अब स्कूल प्रबंधन बच्चों का रिजल्ट छत्तीसगढ़ बोर्ड के तहत जारी करने की बात कह रहा है।
अभिभावकों के आरोप
अभिभावकों का कहना है कि एडमिशन के समय स्कूल प्रबंधन ने सीबीएसई पैटर्न से पढ़ाई और परीक्षा का भरोसा दिलाया था। इसी भरोसे पर उन्होंने बच्चों का दाखिला कराया। अब जब वार्षिक परीक्षा पूरी हो चुकी है, तो अचानक दोबारा परीक्षा दिलाने का दबाव बनाया जा रहा है। इससे वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
रात में आए मैसेज से भड़का विवाद
सोमवार 16 मार्च की रात करीब 8 बजे अभिभावकों के मोबाइल पर स्कूल प्रबंधन की ओर से संदेश भेजा गया कि 17 मार्च को सुबह 8 बजे गणित की परीक्षा छत्तीसगढ़ हायर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित की जाएगी और छात्रों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। जबकि बच्चों की वार्षिक परीक्षा एक सप्ताह पहले ही पूरी हो चुकी थी। अचानक आए इस संदेश से अभिभावक और विद्यार्थी भड़क गए।
शिक्षा विभाग पर भी उठे सवाल
मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि बिना मान्यता के कोई स्कूल सालभर तक सीबीएसई का बोर्ड लगाकर कैसे चल सकता है। जिला शिक्षा अधिकारी ने समय रहते जांच क्यों नहीं की और अब सैकड़ों बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा।