₹7 लाख की मदद से बची मासूम की जान, हैदराबाद में हुई जटिल ओपन हार्ट सर्जरी

चिरायु योजना बनी परिवार का सहारा

अस्पताल में डॉक्टरों की टीम के साथ मासूम।

यश विश्वकर्मा @ बिलासपुर। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत संचालित चिरायु योजना ने एक बार फिर गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चे को नया जीवन दिया है। तखतपुर विकासखंड की चिरायु टीम की पहल से 6 वर्षीय टोकेश्वर निर्मलकर की हैदराबाद में सफल ओपन हार्ट सर्जरी कराई गई। करीब 7 लाख रुपए की लागत वाले इस इलाज का पूरा खर्च शासन ने वहन किया।

उसलापुर निवासी रामायण निर्मलकर के पुत्र टोकेश्वर को चिरायु दल ने नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान चिन्हित किया था। जांच में बच्चे के हृदय में गंभीर जन्मजात विकार पाया गया। चिकित्सकों ने बताया कि बीमारी इतनी जटिल थी कि किसी भी समय उसकी जान को खतरा हो सकता था।

स्क्रीनिंग में सामने आई बीमारी, जिला अस्पताल से मेकाहारा तक पहुंचा मामला

बच्चे की स्थिति को देखते हुए चिरायु दल ने उसे जिला अस्पताल बिलासपुर रेफर किया। यहां विशेषज्ञों की जांच के बाद रायपुर स्थित मेकाहारा भेजा गया। विस्तृत परीक्षण में डॉक्टरों ने पाया कि बच्चे की हृदय संबंधी समस्या अत्यंत जटिल है और इसका उपचार राज्य के बाहर किसी सुपर स्पेशियलिटी कार्डियक सेंटर में ही संभव है।

हैदराबाद के केयर हॉस्पिटल में हुआ इलाज

मेकाहारा से बच्चे को हैदराबाद के केयर हॉस्पिटल भेजा गया। वहां विशेषज्ञ हृदय रोग चिकित्सकों ने बताया कि बच्चे को बचाने के लिए जटिल ओपन हार्ट सर्जरी जरूरी है। ऑपरेशन की अनुमानित लागत करीब 7 लाख रुपए बताई गई, जिसे गरीब परिवार के लिए वहन करना संभव नहीं था।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शुभा गरेवाल के निर्देशन में सभी आवश्यक दस्तावेज और प्रशासनिक प्रक्रिया प्राथमिकता से पूरी कराई गई। इसके बाद राज्य नोडल एजेंसी ने उपचार के लिए 7 लाख रुपए की स्वीकृति दी और राशि सीधे अस्पताल को भेजी गई।

8 मई को हुआ ऑपरेशन, 29 मई को मिली छुट्टी

आर्थिक स्वीकृति मिलने के बाद बच्चे को हैदराबाद भेजा गया, जहां 8 मई 2026 को विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने कई घंटे तक चली जटिल ओपन हार्ट सर्जरी सफलतापूर्वक की। उपचार के बाद बच्चे की स्थिति में लगातार सुधार हुआ और 29 मई को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वर्तमान में बच्चा स्वस्थ है और सामान्य जीवन जी रहा है।

घर पहुंचकर भी कर रहे निगरानी

सर्जरी के बाद भी चिरायु दल बच्चे की नियमित मॉनिटरिंग कर रहा है। टीम समय-समय पर घर पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण और फॉलोअप कर रही है ताकि भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

इनका रहा विशेष योगदान

इस पूरी प्रक्रिया में सीएमएचओ डॉ. शुभा गरेवाल, बीएमओ डॉ. उमेश साहू, जिला नोडल अधिकारी डॉ. सौरभ शर्मा, विकासखंड प्रबंधक केशर सिंह, चिरायु चिकित्सक डॉ. शरद कुर्रे, डॉ. निशा बोरकर, आनंद सोनी और रंभा देवी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

कलेक्टर ने की टीम की सराहना

कलेक्टर संजय अग्रवाल ने चिरायु दल और स्वास्थ्य विभाग की टीम की प्रशंसा करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना है। इस मामले में अधिकारियों और चिकित्सकों ने संवेदनशीलता व समर्पण के साथ कार्य करते हुए एक मासूम की जिंदगी बचाने का उल्लेखनीय कार्य किया है।

परिवार बोला- समय पर मदद नहीं मिलती तो बेटा नहीं बचता

बच्चे के परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग, चिरायु योजना और शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यदि चिरायु दल समय पर बीमारी की पहचान नहीं करता और आर्थिक सहायता नहीं मिलती, तो उनके बेटे का जीवन बचाना संभव नहीं था।