

शिव-सती विवाह की दिव्य गाथा से सजा कथा पंडाल, भक्ति, तप और समर्पण का संदेश सुन भावुक हुए श्रद्धालु
स्वर्ग-नरक और मोक्ष का मिला आध्यात्मिक संदेश, सद्कर्म, सत्य आचरण और शिव भक्ति को बताया जीवन का आधार
शिव महापुराण कथा में गूंजा हिमालय महात्म्य और शिव-सती विवाह प्रसंग

बिलासपुर। जिले के भरारी क्षेत्र स्थित ग्राम सेमरा में 12 फरवरी से 20 फरवरी 2026 तक श्री शिव महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ एवं रुद्राभिषेक का भव्य आयोजन किया जा रहा है। आयोजन में क्षेत्रभर के श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। कथा वाचन पंडित बुद्धेश्वर तिवारी (अमोरा वाले) द्वारा किया जा रहा है।
सोमवार, 16 फरवरी को फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी के पावन अवसर पर कथा में विशेष रूप से हिमालय की उत्पत्ति एवं महात्म्य, दक्ष की देवी आराधना, सती आह्वान और भगवान शिव-सती विवाह प्रसंग का विस्तृत वर्णन किया गया। कथा स्थल पर सुबह 9 से 11 बजे तक प्रतिदिन रुद्राभिषेक किया जा रहा है, जबकि दोपहर 3 बजे से शिव महापुराण कथा का वाचन प्रारंभ होकर हरि रस तक चलता है।
कथावाचक कथा वाचन पंडित बुद्धेश्वर तिवारी ने बताया कि पुराणों के अनुसार हिमालय को पर्वतराज और देवताओं का निवास स्थान माना गया है। तप और साधना की भूमि के रूप में इसकी विशेष महिमा है। गंगा अवतरण की पावन स्थली होने के कारण हिमालय सनातन संस्कृति में आस्था का प्रतीक है।

कथा में बताया गया कि प्रजापति दक्ष प्रजापति ने आदिशक्ति की कठोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर देवी ने उनके यहां पुत्री रूप में जन्म लिया। यही सती आगे चलकर भगवान भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर साधना करती हैं। अंतत: देवताओं और ऋषियों की उपस्थिति में शिव-सती का दिव्य विवाह संपन्न होता है, जो त्याग और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
कथा में स्वर्ग, नरक और मोक्ष का भी वर्णन किया गया। श्रद्धालुओं को बताया गया कि पुण्य कर्म से स्वर्ग और पाप कर्म से नरक की प्राप्ति होती है, जबकि सच्ची भक्ति, तप और सत्य आचरण से मोक्ष संभव है।
कार्यक्रम में मुख्य यजमान के रूप में संतोष साहू-कौशल्या साहू, राकेश साहू-गीता साहू, रूपेश साहू-मनीषा साहू, भगवती जान बाई-जगवती शांति, अशोक-भारती, प्रमोद-लीना सहित समस्त साहू परिवार की सक्रिय भागीदारी रही। गुरु सान्निध्य में रामकुमार वैष्णव एवं इन्द्राणी वैष्णव की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। आयोजन समिति ने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से कथा श्रवण कर पुण्य लाभ लेने की अपील की है।